Paryatan Ka Mahatva Essay Help

पर्यटन का महत्व

 पर्यटन का आनंद –

सैर कर दुनिया की गाफ़िल, ज़िंदगानी फिर कहाँ ?

जिंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहाँ ?

     जीवन का असली आनंद घुमक्कड़ी में है ; मस्ती और मौज में है | प्रकृति के सौंदर्य का रसपान अपनी आँखों से उसके सामने उसकी गोद में बैठकर ही किया जा सकता है | उसके लिए आवश्यक है – पर्यटन |

पर्यटन के लाभ – पर्यटन का अर्थ है – घूमना | बस घुमने के लिए घूमना | आनंद-प्राप्ति और जिज्ञासा-पूर्ति के लिए घूमना | ऐसे पर्यटन में सुख ही सुख है | ऐसा पर्यटन दैनंदिन जीवन की भारी-भरकम चिंताओं से दूर होता है | जो व्यक्ति इस दशा में जितनी देर रहता है, उतनी देर तक वह आनंदमय जीवा जीता है |

     पर्यटन का दूसरा लाभ है – देश विदेश की जानकारी | इससे हमारा ज्ञान समृद्ध होता है | पुस्तकीय ज्ञान उतना प्रभावी नहीं होता जितना कि प्रत्यक्ष ज्ञान | पर्यटन से हमें देश-विदेश के खान-पान, रहान-सहन तथा सभ्यता-संस्कृति की जानकारी मिलती है | इससे हमारे मन में बैठ हुए कुछ अंधविश्वाश टूटते हैं | हमें यह विश्वास होता है – विश्व – भर का मानव मूल रूप से एक है | हमारी आपसी दूरियाँ कम होती हैं | मन उदार बनता है | पूरा देश और विश्व अपना-सा प्रतीत होता है | राष्ट्रिय एकता बढ़ाने में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान है |

पर्यटन : एक उद्दोग – वर्तमान समय में पर्यटन एक उद्दोग का रूप धारण कर चूका है  | हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि पर्वतीय स्थलों की अर्थ-व्यवस्था पर्यटन पर आधारित है | वहाँ वर्षभर विश्व-भर से पर्यटक आते हैं और अपनी कमाई खर्च करते हैं | इससे ये पर्यटक-स्थल फलते-फूलते हैं | वहाँ के लोगों को आजीविका का साधन मिलता है |

पर्यटन के प्रकार – पर्यटन-स्थल अनेक प्रकार के हैं | कुछ प्रकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात हैं | जैसे-प्रसिद्ध पर्वत-चोटियाँ, समुद्र-तल, वन-उपवन | कुछ पर्यटन-स्थल धर्मित महत्व के हैं | जैसे हरिद्वार, वैष्णो देवी, काबा, कर्बला आदि | कुछ पर्यटन-स्थल एतेहासिक महत्व के हैं | जैसे लाल किला, ताजमहल आदि | कुछ पर्यटन-स्थल वज्ञानिक, सांस्कृतिक या अन्य महत्व रखते हैं | इनमें से प्राकृतिक सौंदर्य तथा धार्मिक महत्व के पर्यटन-स्थलों पर सर्वाधिक भीड़ रहती है |

June 27, 2016evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 CommentsHindi Essay, Hindi essays

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पर्यटन उगैर उसका महत्त्व | Essay on The Importance of Tourism in Hindi!

पर्यटन का महत्त्व प्रत्येक देश में स्वीकार किया जा चुका है । पाश्चात्य जगत् के प्रख्यात विचारक मांटेन का कथन है कि पर्यटन के अभाव में कोई व्यक्ति पूर्ण शिक्षित नहीं कहा जा सकता । आधुनिक युग में प्रत्येक शिक्षा-प्रणाली में पर्यटन की योजना अनिवार्य रूप से सन्निविष्ट है ।

आदिकाल से मनुष्य पर्यटन का प्रेमी रहा है । मनुष्य की प्रकृति में पर्यटन का बीज परमपिता ने बोया । मानवीय सभ्यता उसी के प्रस्कुटन का परिणाम है । जैसा कि नाम से स्पष्ट है, पर्यटन का तात्पर्य देश-विदेश में परिभ्रमण है । पर्यटन निरुद्‌देश्य नहीं होता ।

पर्यटन की प्रेरणा राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक, व्यापारिक आदि अनेक कारणों से प्राप्त हो सकती है । इनके अतिरिक्त मनोरंजन, अनुसंधान, अध्ययन, स्वास्थ्य-लाभ अथवा अन्य व्यक्तिगत कारण भी पर्यटन के मूल में हो सकते हैं । सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए संसार के सभी सभ्य देशों के बीच नागरिकों की यात्रा अब नित्य की दिनचर्या है ।

विद्याध्ययन के लिए एक देश के छात्र दूसरे देश में जाते हैं । ऐसी यात्राओं से व्यक्तिगत उद्‌देश्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय उद्‌देश्यों की पूर्ति भी होती है । पर्यटन में देश-दर्शन की भावना सर्वोपरि होती है । प्रकृति की विविध मनोहारी छटाओं को चुरा-चुराकर हृदय में रखते जाना; उसकी सुषमा से नेत्र और मन को तृप्त करते जाना; मार्ग में आनेवाले नगरों, भवनों, वन-प्रांतरों आदि की शोभा और ग्रामश्री का आस्वादन करते जाना चाहिए ।

सौभाग्य से समस्या-संकुल इस व्यस्त संसार में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् १९६७ को ‘अंतरराष्ट्रीय पर्यटन वर्ष’ घोषित किया था । संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने ४ नवंबर, १९६६ को यह निर्णय लिया । इस प्रकार प्रथम बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बहुत महत्त्व दिया गया ।

हमारे लिए एक और दृष्टि से भी इसका महत्त्व है । इसमें विकासशील देशों में पर्यटन को प्रोत्साहन देने पर विशेष बल दिया गया था । इसलिए पर्यटन को उद्योग के रूप में अपनाने और उसका प्रचार करने का सन् १९६७ में हमें बड़ा सुअवसर प्राप्त हुआ । कारण, भारत बहुत बड़ा देश है और यहाँ पर्यटन के विकास की काफी संभावनाएँ हैं ।

विदेशी पर्यटकों के लिए भारत में अनेक आकर्षण हैं । विगत पंद्रह-सोलह वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में ८० प्रतिशत की वृद्धि हुई है, फिर भी अभी और वृद्धि की संभावना है । परंतु इसमें हमारे सीमित साधन बाधक हैं, जिसके कारण यहाँ पर्यटकों के ठहरने के स्थान, परिवहन, मनोरंजन आदि की सुविधाएँ बहुत अधिक नहीं बढ़ाई जा सकतीं; किंतु संगठित प्रयत्न करके कम-से-कम समय में उसे दूर किया जा सकता है । सरकार की ओर से कोलकाता, मुंबई, वाराणसी, उदयपुर, बंगलौर तथा अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानों में होटलों के निर्माण और विस्तार की योजना है ।

भारत में मेलों और त्योहारों की प्राचीन परंपरा रही है । विदेशी पर्यटक इन्हें देखने को लालायित रहते हैं । अंतरराष्ट्रीय पर्यटन वर्ष में इनका आयोजन पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक रहा । केरल का ओणम (तिरुओणम्), चेन्नई का पोंगल, मैसूर का दशहरा, गुजरात का नवरात्र, राजस्थान का गणगौर, कोलकाता की दुर्गा-पूजा, दिल्ली की होली आदि देश के विभिन्न भागों में मनाए जानेवाले ऐसे ही त्योहार हैं ।

दिल्ली के लालकिले में ‘ध्वनि और प्रकाश’ का कार्यक्रम संध्याकालीन मनोरंजन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है । अब आगरा, गोलकुंडा, अजमेर, चित्तौड़गढ़ जैसे स्थानों पर भी ऐसे कार्यक्रम करने की योजना है । गणतंत्र दिवस भी देश के राष्ट्रीय त्योहारों में से एक है ।

इस अवसर पर दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड पहले से ही पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती आई है । पर्यटन के महत्त्व पर २६ जनवरी, २००६ को परेड में एक विशेष झाँकी प्रस्तुत की गई थी । पर्यटन की सफलता सुविधाओं के विकास पर निर्भर करती है, साथ ही जनता का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है । जनता का आतिथ्य और शिष्टता पर्यटकों को आकर्षित करती है ।

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